तहसीलों में ग्रामीण अदालतें जल्द ही पूर्ण रूप से चालू हो जाएंगी, न्याय व्यवस्था होगी सर्व सुलभ

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ग्रामीण न्यायालय सुरु….

आजमगढ़। जिले की चार तहसीलों में ग्रामीण अदालतें जल्द ही पूर्ण रूप से चालू हो जाएंगी, हला की शुक्रवार को संबंधित जज , मजिस्ट्रेट उक्त तहसीलों में बनाए गए अदालतों में पहुंचे भी फूलपुर तहसील परिसर में पूर्व में बने उपजिलाधिकारी कार्यालय व न्यायालय को नए रंग रूप में लोक निर्माण विभाग द्वारा बना कर संबंधित अधिकारियों को सुपुर्द कर दिया गया है।

जिसमे जिले के एडिशनल सिविल जज अपने कार्यालय पहुंचे व न्यायालय परिसर का निरीक्षण भी किया, मालूम हो कि हाईकोर्ट ने ग्रामीणों न्यायालय को चालू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है इन ग्राम न्यायालयों’ में सिर्फ उन्ही मामलों की सुनवाई की जाएगी जिनमें अधिकतम सज़ा दो वर्ष का कारावास (ज़ुर्माने के साथ या बगैर) या इससे कम हो, अपराध क्षमायोग्य (प्रशमनीय) हो। ‘ग्राम न्यायालय’ के संचालन के लिये राज्य सरकार हाईकोर्ट के परामर्श पर एक ‘न्यायाधिकारी’ की नियुक्ति करेगी साथ ही ग्राम न्यायालय की डिक्रियों और आदेशों का निष्पादन, सिविल विवादों के सुलह और समझौते के लिए प्रयास करने का ग्राम न्यायालय का कर्तव्य होगा व सुलहकारों की नियुक्ति सिविल विवादों का अंतरण । कार्यवाहियों का राज्य की राजभाषा में होना भी लोगों के लिए एक सुविधा होगा।

ग्रामीण न्यायालयों के चालू हो जाने से ग्रामीणों को काफी आसानी होगी। उन्हें भागदौड़ व अनावश्यक खर्च से छुटकारा मिलेगा। जिले के बूढ़नपुर, लालगंज, मेंहनगर और फूलपुर तहसील में बनकर तैयार हो चुके ग्राम न्यायालयों को क्रियाशील करने की कवायद शुरू हो गई है। डायस और चैंबर की व्यवस्था पूरी हो चुकी है। हाईकोर्ट ने इन न्यायालयों को चालू करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। वर्ष 2008 में ग्राम न्यायालय अधिनियम पारित किया गया था और अक्तूबर 2009 में यह लागू हुआ। यह ग्राम न्यायालयों की स्थापना को अनिवार्य करता है। देश में ग्रामीण अदालतें अभी भी बहुत कम हैं। ग्राम न्यायालय अधिनियम के तहत वर् 2012 तक सभी तहसीलों में ग्राम न्यायालय स्थापित करने का आदेश दिया गया था लेकिन कुछ व्यवस्था निर्माण व जिले के अधिवक्ताओं द्वारा विरोध के चलते इसमें देरी आती गई।

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