छह माह से विकास कार्यों पर पड़ा असर
फूलपुर एक्सप्रेस, फूलपुर (आजमगढ़)। पंचायत चुनाव की घोषणा में हो रही देरी का असर अब गांवों के विकास कार्यों पर साफ दिखाई देने लगा है। बीते लगभग छह माह से ग्राम प्रधानों की स्थिति उपेक्षित बनी हुई है, जिसके चलते ग्राम पंचायतों में विकास कार्य लगभग ठप पड़ गए हैं। प्रधानों का अधिकांश समय पंचायत चुनाव और आरक्षण की संभावित स्थिति को समझने में बीत रहा है।
आरक्षण और राजनीतिक समीकरण में उलझे रहे प्रधान
ग्राम प्रधान लगातार यह जानकारी जुटाने में लगे रहे कि पंचायत चुनाव में सीटों का आरक्षण किस आधार पर होगा। इसी असमंजस के कारण विकास कार्यों की बजाय राजनीतिक समीकरण और सीट बचाने की रणनीति पर अधिक ध्यान दिया जाता रहा। कई प्रधानों द्वारा कार्यकाल बढ़ाने की मांग भी उठाई जाती रही, लेकिन शासन स्तर से अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया।
भुगतान और धन निकासी की कोशिशें तेज
कार्यकाल समाप्ति के अंतिम दौर में अब प्रधान ग्राम निधि एवं अन्य मदों में उपलब्ध धनराशि के भुगतान और निकासी की जुगत में जुटे हैं। खासकर जी-रामजी योजना तथा अन्य योजनाओं से कराए गए कार्यों के भुगतान को लेकर प्रधान सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। हालांकि महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत कराए गए कार्यों के भुगतान में हो रही देरी से प्रधानों में निराशा बढ़ती जा रही है।
पंचायत अधिकारी भी जिम्मेदारियों से पीछे हटते दिखे
वहीं ग्राम पंचायत अधिकारी भी अंतिम समय में भुगतान संबंधी जिम्मेदारियों से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। दूसरी ओर प्रधान पंचायत सहायकों के साथ पंचायत भवनों पर डटे हुए हैं और बकाया भुगतान निकलवाने की कोशिशों में लगे हैं।
कार्यकाल समाप्ति पर सबकी निगाहें
सोमवार को ग्राम प्रधानों के कार्यकाल का अंतिम दिन माना जा रहा है। ऐसे में अब सबकी निगाह इस बात पर टिकी है कि कितने प्रधान अपने लंबित भुगतान प्राप्त करने में सफल हो पाते हैं।
रिपोर्ट _ आर पी सिंह






