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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: ‘विकसित भारत’ की दिशा में आधी आबादी का ऐतिहासिक कदम

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– नेहरू हॉल में सम्मेलन व प्रेस वार्ता आयोजित, जनपद की प्रबुद्ध महिलाओं ने प्रधानमंत्री का जताया आभार – संसद के विशेष सत्र (16-18 अप्रैल) को महिला सशक्तीकरण के नए अध्याय का बताया प्रतीक

आजमगढ़ (17 अप्रैल 2026): नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से देश की राजनीति और नीति-निर्धारण में महिलाओं की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के संकल्प को आज आजमगढ़ में नई धार मिली। शहर के नेहरू हॉल में आयोजित विशेष सम्मेलन और प्रेस वार्ता में जनपद की प्रतिष्ठित चिकित्सकों, शिक्षाविदों, साहित्यकारों और महिला अधिकारियों ने एक स्वर में इस कानून को महिला सशक्तीकरण का सबसे बड़ा मील का पत्थर बताया।

जिला सूचना अधिकारी डॉ. पंकज कुमार ने कार्यक्रम की प्रासंगिकता पर बल देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 16 से 18 अप्रैल तक संसद में आयोजित नारी शक्ति वंदन विशेष सत्र एक नए युग की शुरुआत है। इसी कड़ी में स्थानीय स्तर पर मातृ शक्तियों को जागरूक करने और इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए धन्यवाद ज्ञापित करने हेतु यह संगम आयोजित किया गया।

प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. ज्योत्सना द्विवेदी ने कहा कि 33 प्रतिशत आरक्षण से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की उपस्थिति बढ़ेगी, जो समावेशी विकास के लिए अनिवार्य है। वहीं, डॉ. गीता सिंह ने बताया कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका सुदृढ़ होने से लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।

शिक्षाविद डॉ. ऋतम्भरा और समाजसेवी विभा बरनवाल ने अधिनियम की संवैधानिक यात्रा (128वां संशोधन) पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कानून ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ को गति देगा। समाज सेवी मिथिलेश पाण्डेय ने बताया कि परिसीमन प्रक्रिया के बाद इसे पूर्णतः लागू करने की दिशा में सरकार तेजी से कदम बढ़ा रही है।

कार्यक्रम के समापन पर जिला विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान जिला प्रोबेशन अधिकारी सुबोध सिंह, डॉ. पूनम तिवारी, डॉ. नेहा, सुमन सिंह राजपूत सहित स्वयं सहायता समूह की दीदियां, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहीं।

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