नई दिल्ली | विशेष संवाददाता
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) समिट के दौरान हंगामा करने के मामले में गिरफ्तार भारतीय युवा कांग्रेस के चार कार्यकर्ताओं को पटियाला हाउस कोर्ट ने पांच दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। अदालत ने आरोपियों की जमानत याचिका को सिरे से खारिज करते हुए दिल्ली पुलिस को विस्तृत पूछताछ की अनुमति दे दी है।
पुलिस की दलील: ‘नेपाल के जेन-जी आंदोलन से प्रेरित था प्रदर्शन’
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में गंभीर दावे किए। पुलिस ने कहा कि यह महज एक विरोध प्रदर्शन नहीं था, बल्कि इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाना था। पुलिस के मुताबिक, यह प्रदर्शन नेपाल के ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन से प्रेरित था और इसकी योजना सोशल मीडिया व मोबाइल फोन के जरिए पहले से बनाई गई थी। पुलिस ने डिजिटल सबूतों और मोबाइल डेटा की जांच के लिए रिमांड की मांग की, ताकि पर्दे के पीछे शामिल अन्य चेहरों का पता लगाया जा सके।
#WATCH | Delhi: Indian Youth Congress AI Summit Protest Case: Advocate Rupesh Singh representing the accused, says, “…Police remand is not permitted for sentences under seven years, regardless of the reason for arrest…The BJP and the government are doing what they’ve always… https://t.co/IiooISR41R pic.twitter.com/McHqKnLEUb
— ANI (@ANI) February 21, 2026
बचाव पक्ष का आरोप: ‘विरोध की आवाज दबा रही सरकार’
आरोपी पक्ष के वकील रुपेश सिंह ने कोर्ट के इस फैसले पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने कहा, “जिन मामलों में सात साल से कम की सजा का प्रावधान है, उनमें पुलिस रिमांड की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। बीजेपी और केंद्र सरकार विरोध की आवाज दबाने के लिए पुलिस का इस्तेमाल कर रही हैं।”
रुपेश सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि बार-बार अनुरोध के बावजूद पुलिस ने अब तक एफआईआर (FIR) की कॉपी भी उपलब्ध नहीं कराई है। उन्होंने इस प्रदर्शन को बेरोजगारी के खिलाफ एक ‘शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध’ करार दिया।
यूथ कांग्रेस का रुख
संगठन ने पुलिस के ‘साजिश’ वाले दावों को पूरी तरह खारिज किया है। यूथ कांग्रेस नेताओं का कहना है कि युवा केवल अपनी समस्याओं और सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वे इस फैसले के खिलाफ जल्द ही उच्च न्यायालय में कानूनी रास्ता अपनाएंगे।






