– 36 हजार संविदाकर्मियों ने मुख्यमंत्री को भेजा 10 सूत्रीय मांगपत्र, मानदेय वृद्धि की मांग – समाधान न होने पर 5 मई को विधानसभा घेराव की दी चेतावनी
फूलपुर (आजमगढ़): उत्तर प्रदेश के करीब 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने अपने नियमितीकरण और राज्य कर्मचारी का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। शनिवार को ब्लॉक मुख्यालय पर जुटे रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक 10 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर अपनी वर्षों पुरानी समस्याओं के समाधान की गुहार लगाई।
रोजगार सेवकों का कहना है कि वे वर्ष 2006 से ग्राम पंचायतों में मनरेगा सहित अन्य सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें आज तक न तो नियमित किया गया और न ही राज्य कर्मचारी जैसी सुविधाएं दी गईं। ज्ञापन में मांग की गई है कि उन्हें सहायक सचिव या ग्राम विकास सहायक के पद पर समायोजित किया जाए।
प्रदर्शनकारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि कई जिलों में कर्मियों का 12 से 14 माह का मानदेय लंबित है। मानदेय न मिलने से बच्चों की पढ़ाई और बीमारों का इलाज कराना मुश्किल हो गया है। रोजगार सेवकों ने न्यूनतम 24 हजार रुपये मासिक मानदेय, ईपीएफ, बोनस और स्वास्थ्य बीमा जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग की है।
कर्मियों ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया, तो आगामी 5 मई 2026 को बैठक कर लखनऊ में विधानसभा घेराव की रणनीति बनाई जाएगी। इस अवसर पर विजय कुमार यादव, ममता यादव, माधुरी यादव, नीलम यादव, राजकुमार, रमाशंकर, धर्मेंद्र, रीता, रवि, रंजीता, मीरा सहित बड़ी संख्या में रोजगार सेवक उपस्थित रहे।
रिपोर्ट _ आर पी सिंह







