आजमगढ़। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार और जनपद न्यायाधीश के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में शुक्रवार को सेंट्रल एकेडमी पब्लिक स्कूल, निज़ामाबाद में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता हेतु एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथियों द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और पुष्पार्चन के साथ हुआ।
बाल श्रम दंडनीय अपराध, शिक्षा सबका अधिकार
नितिका राजन शिविर को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव नितिका राजन ने छात्र-छात्राओं को उनके विधिक अधिकारों की जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से संविधान के अनुच्छेद-24 का उल्लेख करते हुए बताया कि 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से कारखानों, दुकानों या किसी भी सार्वजनिक स्थल पर कार्य कराना एक गंभीर दंडनीय अपराध है।
सचिव ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE), 2009 पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कानून 6 से 14 वर्ष तक के हर बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा की गारंटी देता है। उन्होंने अभिभावकों को प्रेरित किया कि वे अपने बच्चों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करें, क्योंकि राज्य द्वारा उन्हें अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध कराना कानूनन सुनिश्चित किया गया है।
कानूनी प्रावधानों की दी गई जानकारी
मुख्य विधिक प्रतिरक्षा परामर्शदाता आशीष कुमार राय ने शिविर में मौजूद बच्चों और अभिभावकों को पॉक्सो एक्ट (POCSO Act), किशोर न्याय अधिनियम और विधिक प्रतिरक्षा परामर्शदाता प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बच्चों को असुरक्षित स्पर्श और अपनी सुरक्षा के लिए उपलब्ध कानूनी रास्तों के प्रति सचेत किया।
इस अवसर पर तहसील निज़ामाबाद के तहसीलदार, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्य, स्कूल की शिक्षिकाएं, भारी संख्या में छात्र-छात्राएं और अभिभावकगण उपस्थित रहे।







