आजमगढ़ महोत्सव का भव्य समापन: आजमगढ़, महोत्सव में दिखा संस्कृति का संगम, आज़मगढ़ ऋषि-मुनियों की धरती और गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र है,- मंत्री

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  • कल्लू और डिंपल सिंह के गानों पर झूमा आजमगढ़, महोत्सव की अंतिम शाम लोक कला के नाम
  • भोजपुरी ने सात समंदर पार भी लहराया परचम, मॉरीशस में बनाए राष्ट्राध्यक्ष: दारा सिंह चौहान

आजमगढ़। सुरों की महफिल, लोक संस्कृति का संगम और अपनी जड़ों से जुड़ने का उल्लास… राजकीय पॉलिटेक्निक के मैदान में बीते चार दिनों से चल रहे ‘आजमगढ़ महोत्सव 2025’ का शनिवार को रंगारंग समापन हो गया। समापन समारोह के मुख्य अतिथि कारागार मंत्री दारा सिंह चौहान ने दीप जलाकर कार्यक्रम की अंतिम शाम का आगाज किया।

आज़मगढ़ ऋषि-मुनियों की धरती और गंगा-जमुनी तहजीब का केंद्र है-  मंत्री

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में भोजपुरी भाषा की वैश्विक ताकत का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “भोजपुरी सिर्फ भाषा नहीं, हमारा आधार है। हमारे पूर्वज गिरमिटिया मजदूर बनकर मॉरीशस गए, वहां संघर्ष किया और आज उसी मिट्टी के लोग वहां के राष्ट्राध्यक्ष हैं।” उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की लोक कलाओं को नई ऊंचाई मिल रही है। मंत्री जी ने आजमगढ़ को ऋषि दुर्वासा और महान साहित्यकार राहुल सांकृत्यायन की धरती बताते हुए इसे ‘गंगा-जमुनी तहजीब’ का सबसे बड़ा केंद्र करार दिया।

कल्लू और डिंपल की आवाज पर थिरके युवा

महोत्सव की अंतिम शाम पूरी तरह भोजपुरी सितारों के नाम रही। जैसे ही मंच पर अरविंद अकेला ‘कल्लू’ और डिंपल सिंह ने दस्तक दी, पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनके लोकप्रिय गीतों पर दर्शक झूमने को मजबूर हो गए। वहीं, हरिहरपुर घराने के कलाकारों ने जब सारंगी के तार छेड़े, तो लोग मंत्रमुग्ध हो गए। स्कूली बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी खूब वाहवाही बटोरी।

मंत्री दारा सिंह चौहान ने बिना किसी जन-सहयोग (चंदा) या दबाव के इतने भव्य आयोजन के लिए जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की कार्यशैली की प्रशंसा की। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित भी किया गया।

इस मौके पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार, एसएसपी डॉ. अनिल कुमार, सीडीओ परीक्षित खटाना, एडीएम गंभीर सिंह, जिलाध्यक्ष ध्रुव सिंह, विनोद राजभर समेत जिले के तमाम अधिकारी और भारी संख्या में जनमानस मौजूद रहा।

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