निजी अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत; डॉक्टर ने लगाई दो लाख रुपए कीमत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप

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अस्पताल और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप, पुलिस की मौजूदगी में दो लाख में हुआ समझौता

आजमगढ़: आजमगढ़ जिले के फूलपुर थाना क्षेत्र में स्थित यश्लोक अस्पताल व नर्सिंग होम में पित्त की थैली में पथरी के ऑपरेशन के बाद एक महिला की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पुलिस और कुछ प्रभावशाली व्यक्तियों ने कथित तौर पर दो लाख रुपये में समझौता करा दिया।

क्या है पूरा मामला?

फूलपुर के जगदीशपुर निवासी 35 वर्षीय माधुरी विश्वकर्मा, पत्नी संदीप विश्वकर्मा को पित्त की थैली में पथरी की शिकायत थी। 16 अगस्त को उन्हें यश्लोक अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां शनिवार दोपहर करीब 3 बजे डॉ. एम.जेड. सिद्दीकी ने उनका ऑपरेशन किया। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद माधुरी की हालत लगातार बिगड़ती गई और रविवार तड़के चार बजे उनकी मृत्यु हो गई।

महिला की मौत से गुस्साए परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने बताया कि ऑपरेशन से पहले मरीज की पूरी जांच नहीं की गई थी, जिसके कारण ऑपरेशन के बाद जटिलताएं बढ़ गईं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यश्लोक अस्पताल में अनुभवहीन स्टाफ और कंपाउंडर मरीजों का इलाज करते हैं, जिसके चलते पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

घटना की सूचना मिलने पर फूलपुर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। परिजनों के अनुसार, पुलिस और स्थानीय प्रभावशाली लोगों ने मिलकर दो लाख रुपये में समझौता करा दिया। इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो गए हैं, क्योंकि एक व्यक्ति की मौत के मामले में पैसों का लेन-देन कर समझौता कराना कानूनी रूप से गलत है।

मृतका अपने पीछे एक आठ साल की बेटी एंजल और चार साल का बेटा आरओ छोड़ गई है। उनका पति दूसरे राज्य में काम करता है, और परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है।

स्वास्थ्य विभाग पर भी सवाल

यह घटना इस बात को भी उजागर करती है कि क्षेत्र में कई निजी अस्पताल बिना समुचित सुविधाओं और अनुभवी स्टाफ के चल रहे हैं। आरोप है, की फूलपुर तहसील मुख्यालय से लेकर कुंवर नदी के पुल के आसपास तक कई निजी अस्पताल व नर्सिंग होम कथित तौर पर सरकारी अस्पतालों के तैनात डॉक्टर अतिरिक्त फीस लेकर ऑपरेशन करते हैं। जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ जाती है। परिजनों व ग्रामीणों का कहना है कि फूलपुर तहसील मुख्यालय पर चल अवैध अस्पताल व क्लिनिक अनुभव विहीन डॉक्टर पर कार्यवाही होनी चाहिए लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसके बावजूद, स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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