खाद्य संस्करण में चीन के इरादे सही नहीं

चीन में 29 सितंबरको शरद ऋतु का त्यौहार मनाया गया, जिसे अंग्रेजीमें मिड ऑटम फैस्टीवल कहते हैं और चीनी भाषामें इसे चुंगत्सचिये नामसे जाना जाता है। सर्दियोंके आगमनकी तैयारियों और उसके स्वागतके लिए चुंगत्सचिये त्यौहार मनाया जाता है। इस त्यौहारके दिन चीनी लोग प्राचीन समयसे बड़े चावसे मूनकेक खाते हैं, जिसे चीनी भाषामें युएफिंग कहते हैं, जिनमें अंडे, मांस, सब्जियां और मिठाईवाले मूनकेक होते हैं, जिन्हें बनानेमें बहुत मेहनत लगती है और समयके साथ इसे अब व्यावसायिक तौरपर बहुत बड़े पैमानेपर फैक्टरियोंमें बनाया जाने लगा है लेकिन इसके साथ ही चीनमें एक बड़ी परेशानी भी है, वह यह कि लम्बे समयसे चीनमें खाने-पीनेके सामानमें मिलावट होती आ रही है, जिससे चीनी जनता परेशान है। मिड ऑटम फैस्टीवलके दौरान चीनमें बड़े पैमानेपर मूनकेक बाजारमें बिकते हैं। बाजारमें इनकी कीमत बहुत अधिक होती है। कई बार चार से छह मूनकेकका एक पैकेट एक हजार युआनका भी मिलता है। इससे मूनकेकका महत्व समझा जा सकता है। मूनकेकमें सबसे ज्यादा लोकप्रिय और स्वादिष्ट नमकीन अंडेकी जर्दीवाला होता है लेकिन यही मूनकेक इन दिनों चीनियोंकी परेशानीका सबब बना हुआ है, क्योंकि इन दिनों नकली अंडेकी जर्दी मूनकेकमें डाली जा रही है, जिसे ये लोग सोयाबीनके तेल, स्टार्च, खानेवाले फ्लेवर, उसे ज्यादा समयतक ताजा रखनेके लिए रसायन मिलाया जाता है, पोटाशियम सोर्बेट प्रिजर्वेटिव, खानेवाले रंगके साथ कुछ और रसायन मिलाकर बनाया जाता है। इसे जिस मशीनमें बनाया जाता है वह एक घंटे में एक लाख नमकीन अंडेकी जर्दी बना लेती है और 20 नकली अंडेकी जर्दीका पैकेट मात्र 9 युआन 90 माओमें आ जाता है। इसे न सिर्फ इसे मूनकेकमें डाला जाता है, बल्कि पेस्ट्रीके साथ दूसरे पकवानोंमें भी डाला जाता है। साथ ही कई रेस्तरां मालिक भी इन नकली अंडोंकी जर्दीको खरीदते हैं। इन दिनों चीनके सोशल मीडिया सीना वेईबो, वी चैट वीडियो, रेनरेन, यूखोऊ समेत कई दूसरे मीडिया में भी ये वीडियो बहुत बार देखा जा रहा है। इस वीडियोपर लोगों की गुस्से भरी प्रतिक्रिया भी देखनेको मिल रही है। लोग कम्युनिस्ट सरकारसे यह सवाल कर रहे हैं कि क्या उसने अपनी आंखें मूंद रखी हैं, जो उसे बाजारोंमें धड़ल्ले से बिकनेवाले नकली अंडोंकी जर्दी भी दिखाई नहीं दे रही या फिर इन नकली अंडोंकी जर्दी बनानेवाली फैक्टरियां भी सीपीसीके नेताओंकी हैं। लेकिन इस पूरे मुद्देपर चीनकी कम्युनिस्ट सरकारने चुप्पी साध रखी है, न तो इन नकली अंडेकी जर्दी बनानेवाली फैक्टरियोंके खिलाफ कोई काररवाई हुई है और न ही बाजारसे ऐसे मूनकेकके पैकेटोंको जब्त किया गया है। चीनके लोगोंका भरोसा अब हर तरफसे उठता जा रहा है। चीनके जानकारों का मानना है कि कोरोना महामारी तो लगभग हर देशमें फैली थी, फिर ऐसा कैसे हो रहा है कि बाकी दुनियाकी अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरीपर लौट रही है लेकिन चीनकी अर्थव्यवस्था अब भी बदहाली में है, बल्कि दिनों- दिन हालात और भी ज्यादा खराब होते जा रहे हैं। चीनी लोग इसका आरोप अपनी भ्रष्ट सरकारपर लगा रहे हैं। कुछ नेटिजनोंका यह भी सवाल है कि हमारी सरकार, जो जनताकी भलाईका दम्भ भरती है, वह और कितना गिरेगी। क्या चीनकी सरकार हमारी मौतसे भी पैसे कमाना चाहती है। जानकारोंका कहना है जिस दिन लोगोंमें उबाल बढ़ाये उस दिन सीपीसीको एक और तिनानमिन चौराहा देखनेको मिलेगा।

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