स्थिरता और ग्रामीण विकास को मिलेगी नई दिशा, आईआईटी (बीएचयू) और हेस्को के बीच हुआ समझौता…

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वाराणसी। पर्यावरण संरक्षण, स्थिरता और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में अकादमिक ज्ञान को जमीनी स्तर पर लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय), वाराणसी और हिमालयन एनवायरनमेंटल स्टडीज़ एंड कंज़र्वेशन ऑर्गेनाइजेशन, देहरादून के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी का उद्देश्य पर्यावरणीय अनुसंधान, सतत विकास और विशेष रूप से ग्रामीण एवं हिमालयी क्षेत्रों से जुड़ी चुनौतियों का व्यावहारिक समाधान विकसित करना है।

अनुसंधान और जमीनी कार्यों का होगा एकीकरण

यह समझौता शैक्षणिक उत्कृष्टता और फील्ड स्तर पर कार्यान्वयन के समन्वय पर केंद्रित है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, शैक्षणिक सहयोग, समुदाय-आधारित हस्तक्षेप, जनसंपर्क गतिविधियां और क्षमता निर्माण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। साथ ही सरकार के विभिन्न निकायों के साथ मिलकर स्थिरता आधारित नीतियों और हस्तक्षेपों के सह-डिज़ाइन पर भी विशेष बल दिया जाएगा।

वायु प्रदूषण, नीति समर्थन और डेटा विश्लेषण पर फोकस

समझौता ज्ञापन के प्रमुख क्षेत्रों में वायु प्रदूषण प्रबंधन, स्थिरता उन्मुख नीति समर्थन, डेटा विश्लेषण तथा अनुसंधान निष्कर्षों का रणनीतिक संप्रेषण शामिल है। इन सभी गतिविधियों के समन्वय और क्रियान्वयन के लिए आईआईटी (बीएचयू) का एसडीजी केंद्र नोडल केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

दो वर्षों के लिए मान्य रहेगा समझौता

समझौते के अंतर्गत दोनों संस्थान बिना किसी प्रत्यक्ष वित्तीय दायित्व के संयुक्त अनुसंधान गतिविधियों को बढ़ावा देंगे। इसके साथ ही संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों का आदान-प्रदान, संयुक्त बैठकें, सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएं और अल्पकालिक पाठ्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह समझौता प्रारंभिक रूप से दो वर्षों की अवधि के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

निदेशक और हेस्को संस्थापक के बीच हुए हस्ताक्षर

समझौता ज्ञापन पर औपचारिक हस्ताक्षर आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी के निदेशक प्रो. अमित पात्रा और पद्म भूषण से सम्मानित, हेस्को के संस्थापक डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के बीच किए गए। इस अवसर पर डॉ. जोशी नें कहा कि सतत जीवन शैली अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारे ग्रह और आने वाली पीढ़ियों के अस्तित्व के लिए एक अनिवार्यता बन चुकी है।

हस्ताक्षर समारोह में कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

हस्ताक्षर समारोह में प्रो. राजेश कुमार (अधिष्ठाता, अनुसंधान एवं विकास), प्रो. हीरालाल प्रामाणिक (अधिष्ठाता, संसाधन एवं पूर्व छात्र), प्रो. अभा मिश्रा (सह-अधिष्ठाता, अनुसंधान एवं विकास), प्रो. विकास कुमार दुबे (प्रोफेसर-इन-चार्ज, एसडीजी केंद्र) तथा डॉ. देवेंद्र प्रताप (उप कुलसचिव) सहित अनेक संकाय सदस्य और अधिकारी उपस्थित रहे।

दोनों संस्थानों की भूमिका स्पष्ट

इस सहयोग के अंतर्गत आईआईटी (बीएचयू), वाराणसी अनुसंधान नेतृत्व, तकनीकी विशेषज्ञता, शैक्षणिक सहयोग और डेटा प्रबंधन उपलब्ध कराएगा, जबकि हेस्को अपनी मजबूत जमीनी उपस्थिति, सामुदायिक सहभागिता, जनसंपर्क पहलों, नीति समर्थन और ग्रामीण विकास एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपने दीर्घकालिक अनुभव के माध्यम से योगदान देगा।

सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों को मिलेगा बढ़ावा

इस अवसर पर प्रो. अमित पात्रा नें कहा कि हेस्को के साथ यह समझौता ज्ञापन संस्थान की स्थिरता आधारित अनुसंधान और सामाजिक रूप से प्रासंगिक नवाचारों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आईआईटी (बीएचयू) की तकनीकी क्षमताओं और हेस्को के ग्रामीण विकास अनुभव के संयोजन से प्रभावशाली और व्यावहारिक समाधान विकसित किए जा सकेंगे।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रकार की साझेदारियां उन्नत अनुसंधान और सामाजिक आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाती हैं और यह सहयोग राष्ट्रीय स्थिरता लक्ष्यों के अनुरूप ज्ञान के प्रभावी रूपांतरण को सुनिश्चित करेगा।

कुल मिलाकर, यह समझौता शैक्षणिक अनुसंधान को समुदाय-आधारित समाधानों से जोड़ने की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे पर्यावरणीय स्थिरता और समावेशी विकास के लिए दीर्घकालिक और सार्थक प्रभाव सुनिश्चित किए जा सकेंगे।

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