आजमगढ़ में ठंड का सितम जारी: कागजों में जल रहे अलाव, हाड़ कंपाती ठंड में कूड़ा जलाने को मजबूर लोग

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  • फूलपुर तहसील में ‘ठंडा’ पड़ा अलाव का दावा, लेखपालों की ड्यूटी पर उठे सवाल?

फूलपुर (आजमगढ़), 19 दिसंबर। कड़ाके की ठंड और घने कोहरे की चादर ने फूलपुर तहसील क्षेत्र में जनजीवन की रफ्तार थाम दी है। प्रशासन भले ही 19 चिन्हित स्थानों पर अलाव जलाने के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि ठिठुरते लोग सार्वजनिक स्थलों पर घास-फूस और कचरा जलाकर ठंड से बचने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं। तहसील प्रशासन की यह ‘कागजी गर्मी’ आम जनता को राहत देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही है।

चिन्हित स्थल केवल फाइलों तक सीमित

हर साल शासन की ओर से अलाव के लिए भारी-भरकम बजट आवंटित किया जाता है। इस वर्ष भी फूलपुर तहसील प्रशासन ने नगर पंचायत फूलपुर में 5 और माहुल में 2 सहित कुल 19 स्थानों पर अलाव जलाने और लेखपालों की ड्यूटी लगाने का दावा किया है। लेकिन तहसील परिसर, माहुल रोड, खोरासो, पवई चौराहा, अंबारी, मित्तूपुर और गनवारा बाजार जैसे व्यस्त इलाकों में अलाव की कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आ रही है।

उदासीनता का आलम: प्रदूषण और हादसों का खतरा

प्रशासनिक उदासीनता के चलते लोग मजबूरन कचरा और प्लास्टिक जला रहे हैं। इससे न केवल जहरीला धुआं पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि सड़क किनारे असुरक्षित ढंग से जल रहे इन अलावों से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों की बाजारों में स्थिति और भी खराब है, जहां दूर-दराज से आने वाले मुसाफिरों को ठिठुरना पड़ रहा है।

क्या कहते हैं जिम्मेदार? “कुल 19 स्थानों पर अलाव जलाने की व्यवस्था की गई है और संबंधित लेखपालों की जिम्मेदारी तय की गई है। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। राजस्व निरीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे अलाव जलते हुए फोटो व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा करें।” — अशोक कुमार, उपजिलाधिकारी (SDM), फूलपुर

सवालों के घेरे में ‘व्हाट्सएप वाली रिपोर्टिंग’

एसडीएम के सख्त निर्देशों के बावजूद सवाल यह उठता है कि क्या केवल फोटो खींचकर ग्रुप में भेजने से जनता की ठंड दूर हो जाएगी? क्षेत्र की जनता अब यह देख रही है कि प्रशासन के ये निर्देश कब धरातल पर उतरेंगे और कब उन्हें इस कड़कड़ाती ठंड से वास्तविक राहत मिलेगी।

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