सहरसा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में ‘भावनात्मक बुद्धिमत्ता’ पर विशेष सत्र का आयोजन

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बिहार : ( रिपोर्ट- चेतन सिंह ) आज सहरसा कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में प्रथम सेमेस्टर के छात्रों के लिए “भावनात्मक बुद्धिमत्ता” (Emotional Intelligence) पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. (डॉ.) राम चंद्र प्रसाद द्वारा किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. अरुण कुमार जयसवाल थे, जिन्होंने “भावनात्मक बुद्धिमत्ता” के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला और इसे न केवल व्यक्तिगत बल्कि पेशेवर जीवन में भी आवश्यक बताया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार भावनात्मक संतुलन और आत्म-जागरूकता से एक व्यक्ति अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। छात्रों ने इस सत्र के दौरान डॉ. जयसवाल जी के अनुभवों और मार्गदर्शन से गहरे प्रेरणा ली।

कार्यक्रम के समापन और धन्यवाद ज्ञापन की जिम्मेदारी प्रो. (डॉ.) नागमणि आलोक द्वारा की गई, जिन्होंने अपनी कुशल समन्वयक भूमिका से पूरे आयोजन को सफलतापूर्वक संचालित किया। धन्यवाद ज्ञापन में उन्होंने प्रतिष्ठित लेखक सलीम खान की एक विशेष शायरी का उल्लेख किया, जो भावनात्मक बुद्धिमत्ता पर आधारित थी:

” दिल के जज़्बात समझ लेना भी हुनर है,
हर शख्स कह कर इज़हार नहीं करता।”

इस शायरी के माध्यम से उन्होंने छात्रों को यह संदेश दिया कि दूसरों की भावनाओं को समझना और आत्म-नियंत्रण करना ही सच्ची भावनात्मक बुद्धिमत्ता का प्रमाण है। इस सत्र में छात्रों की भागीदारी उत्साहपूर्ण रही और यह सत्र छात्रों के लिए उनके आगामी शैक्षणिक जीवन में भावनात्मक संतुलन और सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा। सत्र के आयोजन में प्रो० पूनम कुमारी का भी योगदान महत्वपूर्ण रहा।

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