“सुर-ताल और साहित्य का संगम: आजमगढ़ महोत्सव के तीसरे दिन कवियों ने बांधा समां, स्थानीय कलाकारों ने बिखेरी चमक”

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“लोक गायन और नृत्य में स्कूली बच्चों ने दिखाई प्रतिभा, शानदार प्रस्तुति देने वाले कलाकारों को मिला प्रशस्ति पत्र”

आजमगढ़ : राजकीय पॉलिटेक्निक परिसर में आयोजित पांच दिवसीय ‘आजमगढ़ महोत्सव 2025’ के तीसरे दिन सांस्कृतिक कार्यक्रमों और साहित्य की त्रिवेणी बही। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ मुख्य अतिथि माननीय विधान परिषद सदस्य विजय बहादुर पाठक द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।

साहित्यिक संध्या: तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा पंडाल

महोत्सव की तीसरी शाम पूरी तरह कवियों के नाम रही। कार्यक्रम की शुरुआत कवयित्री मणिका दूबे द्वारा प्रस्तुत मधुर ‘सरस्वती वंदना’ से हुई। इसके पश्चात देश के प्रख्यात कवियों ने अपनी रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया:

  • डॉ. सुनील जोगी और शंभू शिखर: अपनी हास्य और व्यंग्य की कविताओं से श्रोताओं को लोटपोट कर दिया।

  • नीलोत्पल मृणाल और सर्वेश अस्थाना: युवाओं के बीच लोकप्रिय इन कवियों ने अपनी ओजस्वी वाणी से राष्ट्रप्रेम और सामाजिक सरोकारों को स्वर दिया।

  • प्रियांशु गजेंद्र और विकास बौखल: अपनी विशिष्ट शैली में कविता पाठ कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी।

मुख्य अतिथि विजय बहादुर पाठक ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से जनपद की सांस्कृतिक पहचान को नई ऊंचाई मिलती है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह कवि सम्मेलन लोगों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा।

स्थानीय प्रतिभाओं ने बिखेरी चमक

दिन के सत्र में स्कूली बच्चों और स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। लोक गायन, लोक नृत्य और एकल गायन की प्रस्तुतियों ने आजमगढ़ की समृद्ध विरासत को मंच पर जीवंत कर दिया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कलाकारों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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