अजमतगढ़: गौशाला से गोवंश तस्करी की कोशिश नाकाम, प्रधान व सचिव समेत तीन पर मुकदमा

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🔶 मऊ एसओजी की सक्रियता से टली घटना, जीयनपुर पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल

जीयनपुर (आजमगढ़)। विकास खंड अजमतगढ़ के पारनकुंडा स्थित सरकारी गौशाला में शनिवार-रविवार की दरमियानी रात गोवंश तस्करी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। मऊ जनपद की एसओजी टीम की समय रहते सक्रियता से तस्कर अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो सके, लेकिन इस घटना ने स्थानीय जीयनपुर कोतवाली पुलिस की मुस्तैदी की पोल खोलकर रख दी है।

तस्करी की योजना और एसओजी की छापेमारी

सूत्रों के अनुसार, शनिवार रात दो वाहनों के जरिए गौशाला से गोवंशों को बाहर ले जाने की तैयारी थी। इसी बीच मऊ एसओजी को इसकी भनक लग गई और टीम ने मौके पर घेराबंदी कर दी। एसओजी की आहट पाकर तस्कर वाहन छोड़कर फरार हो गए। बरामद वाहनों में से एक बलिया नंबर की बताई जा रही है, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस तस्करी के तार अंतरजनपदीय गिरोह से जुड़े हैं।

जांच में खुले परत-दर-परत राज

घटना की सूचना मिलते ही जिला स्तरीय अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए:

बाहरी पशुओं की एंट्री: गौशाला में हाल ही में बाहर से कुछ नए पशु लाए गए थे, जिनका रिकॉर्ड संदिग्ध है।

केयरटेकर की भूमिका: वारदात के समय गौशाला का केयरटेकर मौके से गायब था, जो मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

प्रधान की अनभिज्ञता: ग्राम प्रधान ने इस पूरे मामले में किसी भी जानकारी से इनकार किया है, जिसे अधिकारी संदेह की दृष्टि से देख रहे हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई: दर्ज हुआ मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए खंड विकास अधिकारी (BDO) अजमतगढ़ की तहरीर पर पुलिस ने ग्राम प्रधान, पंचायत सचिव और केयरटेकर के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। इससे पूर्व कोतवाली पुलिस ने अज्ञात तस्करों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया था।

“गौशाला की सुरक्षा में लापरवाही और तस्करी के प्रयास को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बीडीओ की तहरीर पर संबंधितों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। मामले के हर पहलू की गहराई से जांच होगी।” — प्रशासनिक आधिकारिक बयान

चर्चा का विषय बनी जीयनपुर पुलिस की भूमिका

स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि जिस घटना की भनक पड़ोसी जनपद मऊ की पुलिस को लग गई, उसकी जानकारी स्थानीय जीयनपुर पुलिस को क्यों नहीं हुई? बलिया नंबर के वाहनों का बेखौफ घूमना और गौशाला तक पहुंच जाना पुलिस की गश्त और खुफिया तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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