कब तक सहरसा का विकास यू ही सड़क जाम तक रहेगा सीमित 

( ब्यूरो चीफ / चेतन सिंह ) सहरसा में जाम की समस्या कोई नई बात नहीं है। इस जाम की समस्या से आम जनता के साथ एम्बुलेंस के मरीजों को उठानी पड़ती है यातनाएं । सहरसा में आए दिन हर रोज शहर के बंगाली बाजार ढाला और गंगजला ढाला पर जाम की समस्याएं से परेशान रहते हैं आम जनता वही अगर बात करे तो शहर के अस्पताल में भर्ती मरीजों को अगर शहर से बाहर अन्य अस्पतालों में डॉक्टर के द्वारा अगर इलाज के लिए रेफर किया जाता है तो वह मरीज अगर दिन में एम्बुलेंस की मदद से अगर किसी दूसरे अस्पताल में इलाज कराने हेतु निकल भी जाए तो सहरसा के जाम में फंसकर पता नहीं चलता कि समय का पहिया कहा से कहा चला गया लेकिन जाम मुक्त होने की आशंका उन्हें अंदर ही अंदर और बीमार कर देती हैं। वही आए दिन ओवरब्रिज और जाम की समस्याओं को लेकर अलग अलग पार्टी के समाजसेवी के द्वारा कुछ घंटे बैठकर नारा लगाने और धरना प्रदर्शन करने से शहर को कोई भी राहत नहीं दिख रही है। अगर कोई मरीज सीरियस हालत में एम्बुलेंस में बैठकर शहर के किसी दूसरे अस्पताल जाने के लिए निकलते हैं तो कही न कही रास्ते में उन्हें यह डर लगा रहता हैं कि कही हम रेलवे फाटक गिरे रहने से शहर के लंबे जाम में न फंस जाए अब कैसे होगा शहर का विकास कब होगा शहर का विकास बस लोगों के मन में यह सवाल कई सालों से उठ रहा है और रोजमर्रा के व्यस्त जीवन में शहरवासी झेल रहे हैं ओवरब्रिज और सड़क जाम की समस्या । आए दिनों जाम की समस्या से किसी विद्यार्थी का परीक्षा छूटने की बात सामने आती है या किसी मिडिल क्लास परिवार के बच्चों का नौकरी में चयन हेतु उनका जॉब इंटरव्यू छूट जाता है। अब कब तक सहरसा का विकास यू ही चलता रहेगा

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